जानिए क्यों श्री कृष्ण ने अपने ही पुत्र को श्राप दे दिया था?
महाभारत के मुख्य निर्माता श्री कृष्ण को ज्ञान और पराक्रम में कोई हरा नहीं सकता था उन्होंने जन कल्याण हेतु अर्जुन को गीता उपदेश दिया अन्यथा कृष्ण पल भर युद्ध को जीत सकते थे। लेकिन भगवान मानव अवतार में नीतियों का आचरण करते है इसलिए उन्हें भी कई समस्या का सामना करना पड़ा था युद्ध के बाद गांधारी ने कृष्ण के यदुवंश को श्राप दे दिया था।
लेकिन इससे भी पहले कृष्ण के पुत्र साम्ब हुए जो दिखने में बिलकुल कृष्ण जैसे ही थे कृष्ण के पुत्र कामदेव की भांति सुंदर होने के कारण गोपियाँ भी उनसे बहुत प्रेम करती थी। पुराण अनुसार कृष्ण की कुल आठ रानियाँ थी जामवंत और कृष्ण के बीच 28 दिनों तक युद्ध हुआ लेकिन जब जामवंत हार जाते है और कृष्ण को पहचान गए तब उन्होंने अपनी पुत्री जामवंती का विवाह कृष्ण के साथ कर दिया था।
जामवंती और कृष्ण के पुत्र साम्ब हुए जो अधिक रूपवान होने के कारण अन्य छोटी रानी उन्हें गले लगाना चाहती थी इसलिए एक रानी ने साम्ब की पत्नी का रूप धारण करके साम्ब को गले लगाना चाहा। यह देख अन्तर्यामी कृष्ण ने साम्ब को कोढि होने का श्राप दिया और उनकी रानीयों को कृष्ण के जाने के बाद डाकुओं द्वारा हरण करने का श्राप दिया।
इसके बाद साम्ब ने कोढ़ दूर करने के लिए 12 वर्षों तक सूर्य देव की आराधना की इसलिए साम्ब ने चंद्रभागा नदी किनारे सूर्य मंदिर का निर्माण करवाया। आज भी इस नदी में स्नान करने वाले के कोढ़ दूर हो जाते है। यह मंदिर पाकिस्तान के मुल्तान में स्थित है जिसको आदित्य मंदिर भी कहते है इस मंदिर में सूर्य देव की मूर्ति स्वर्ण ने बनाई गयी और उनकी आँखे कीमती पत्थर रूबी से बनवायी गयी थी लेकिन समय के साथ साथ इस मंदिर का स्वर्ण काल समाप्त हो गया क्योंकि मुहम्मद बिन कासिम ने जब मुल्तान पर हमला किया तो वहाँ की कीमती वस्तु भी लुट ली गयी उसके बाद उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए इस मंदिर को हथियार बनाया जिससे कोई हिन्दू शासक मुल्तान पर हमला न कर पाए।

