जानिए क्यों अगस्त्य मुनि ने पुरे समुन्द्र के पानी को पी लिया था?
प्राचीन समय में ऋषि को साधु घोर तपस्वी हुआ करते थे लेकिन इनकी तपस्या को राक्षस भंग किया करते थे। ऐसे समय में मुनि भगवान विष्णु की शरण में जाते थे। एक समय ऐसा हुआ कि अगस्त्य मुनि ने पुरे समुन्द्र के पानी को पी लिया था। जी हाँ उस समय में साधु और संत त्रिकाल ज्ञान रखते थे कहने का अर्थ वे असम्भव कार्य को भी सम्भव कर सकते थे।एक समय की बात है जब दैत्यों के राजा वृतासुर मारा गया जिससे सभी राक्षस प्रतिशोध लेने के लिए समुन्द्र के अंदर निवास करने लग गए क्योंकि यदि वे बहार रहते तो देवताओं के हाथों मारे जाते। देवता यज्ञ और तप से प्रसन्न रहते है इसलिए दैत्यों ने धरती से यज्ञ और धर्म को खत्म करने के लिए साधुओं को परेशान करना शुरू कर दिया था वे लोग रात के समय समुन्द्र से बाहर निकलते और साधुओं के झोपड़ो को नुकसान पहुंचाते थे।
इस तरह धरती पर दान धर्म कम हुआ तो सभी देवता और साधु परेशान श्री हरी विष्णु के पास जाते है। दैत्यों को बहार निकालने के लिए समुन्द्र को सुखाना जरुरी था इसलिए विष्णु ने बताया कि मात्र अगस्त्य मुनि ही इस काम को कर सकते है। सभी देवता विष्णु की बात सुनकर अगस्त्य मुनि के पास गए और अगस्त्य मुनि ने समुन्द्र के पानी को पी लिया जिसके बाद सभी देवता बहार आ गए और दैत्यों का नाश कर दिया।

