मांग में सिंदूर भरने की शुरुवात कब हुई थी, जानिए पूरा रहस्य
एक वक्त की बात है जब एक जंगल में एक युवती धीरा और एक युवक शादी करके आए थे और उस वक्त दोनों की जिंदगी बड़ी हंसी-खुशी से गुजर रही थी। यह सब देखकर वहां के एक डाकू कालिया को इनसे बड़ी ही जलन होने लग गई, तो उसने यह फैसला किया कि वह वीर को मार देगा और फिर धीरा को अपनी बना लेगा। इसलिए उसने वीर को मारने का प्लान बनाना शुरु कर दिया। एक रात की बात है जब वीर और धीरा थक कर बैठे हुए थे और उनको कहीं पर भी कोई शिकार भी नहीं मिला, तो वीर ने धीरा से कहा कि कंदमूल निकाल ले और वह जाकर पानी लेकर आता है और जैसे ही वह पानी लेने के लिए वहां पर गया तो कालिया ने उस पर हमला कर दिया। जिससे वह बेहोश होकर नीचे गिर पड़ा और दर्द से कराहने लगा और तभी धीरा आवाज सुन कर तोड़ कर चली आई। धीरा ने अपने हंसिये से कालिया पर जोर से वार किया और हंसिया कालिया के गले में जा लगा और इससे उसकी मौत हो गयी।
वीर ने यह सब देखा तो वह अति प्रसन्न हुआ और उसने कालिया के बहते हुए खुन को अपने हाथों में लेकर वीरा की मांग में भर दिया। इससे धीरा बहुत ही खुश हुई। तब से ही यह लाल रंग पति पत्नी के बीच एक प्रेम का संकेत माना जाता है, इसीलिए तबसे यह सिंदूर की प्रथा शुरू हुई थी।
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