रावण की बहन शूर्पणखा से श्री कृष्ण ने किया था विवाह, रावण को मारने का रचा था षड्यंत्र
नमस्कार दोस्तों, रामायण का पात्र शूर्पणखा एक राक्षशी और लंकापति रावण की बहन थी। लेकिन एक कथा के अनुसार द्वापर युग में उसने विष्णु राम के ही दूसरे अवतार कृष्ण की पत्नी बनने का स्वभाग्य प्राप्त किया था। रामायण में वर्णित कथा के अनुसार शूर्पणखा ही रामायण युद्ध की सूत्र धार थी। 14 वर्ष का बनवास काटने के दौरान लक्ष्मण को देख कर, उनके रूप पर मोहित हो कर उन्हें पाने की इच्छा से प्रणय निवेदन करने पर लक्ष्मण द्वारा अपमानित होने पर शूर्पणखा ने ये बात रावण को बताई।
उसी के पश्चात रावण ने सीता के अपहरण की योजना बनाई थी। कहते हैं की शूर्पणखा ने रावण से बदला लेने के लिए ऐसा किया था। लेकिन राक्षशी शूर्पणखा वास्तव में इंद्र के दरबार की एक अप्सरा थी। जिसे एक ऋषि के श्राप के चलते अगले जन्म में राक्षशी शूर्पणखा बन कर जन्म लेना पड़ा था। कथाओं के अनुसार शूर्पणखा के रूप में जन्म लेने से पूर्व वह इंद्र के दरबार में नयनतारा नाम की एक अप्सरा थी। एक बार नृत्य करते हुए जब वह सभी देवताओं को अपनी आंखों की भंगमयी दे रही थी। तब ही इंद्र उस पर मोहित हुए थे और उसे अपनी प्रेयसी बना लिया था।
इंद्र को पता था की नयनतारा के आंखों के आकर्षण से कोई नहीं बच सकता। इसे समझते हुए इंद्र ने एक बार एक ऋषि की तपस्या भंग करने के लिए नयनतारा को धरती पर भेजा। उस दौरान ऋषि की तपस्या तो भंग हो गई, लेकिन ऋषि ने क्रोध में आकर उसे राक्षशी बन जाने का श्राप दे दिया। इससे भयभीत होकर नयनतारा ने इससे मुक्ति पाने के लिए उनसे उपाय भी पूछा। तभी ऋषि ने उसे बताया की सत्य युग में राम से मिलने के बाद ही तुझे इस श्राप से मुक्ति मिलेगी।
इसीलिए राक्षशी रूप में जन्मी नयनतारा अर्थार्थ शूर्पणखा ने युद्ध के लिए रावण को उक्शा कर, भगवान श्री राम द्वारा उसका विनाश करवाया। कहते हैं की युद्ध समाप्त होने के पश्चात शूर्पणखा ने पुष्कर नदी में खड़े होकर दस हज़ार वर्षों तक शिव की आराधना की थी। दस हज़ार वर्ष बाद भगवान शिव ने शूर्पणखा को दर्शन दिया और उसे वर वर भी प्रदान किया। वर के अनुसार 28वें द्वापर युग में जब श्री राम ने कृष्ण का अवतार लिया। तब उन्होंने कुब्जा के रूप में शूर्पणखा से विवाह किया था और उसके कूबर को भी ठीक किया था।

