रामायण के योद्धा मेघनाद के विचित्र रहस्य मेघनाद महाज्ञानी और लंकपति रावण का पुत्र था जो जन्म होते साधारण शिशुओं की तरह रोया नहीं था। उसके मुंह से रोने की जगह बिजली की कड़कने की आवाज सुनाई दी थी इस वजह से रावण ने अपने इस पुत्र का नाम मेघनाद रख दिया था।
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रामायण के योद्धा मेघनाद के विचित्र रहस्य
- युवा अवस्था में मेघनाद ने कठिन तपश्या करके संसार के तीन सबसे घातक ब्र्ह्मास्त्र, पशुपति और वैष्णव अस्त्र प्राप्त कर लिए थे, जिस से किसी को भी नष्ट किया जा सकता था। एक बार देवराज इंद्र के साथ युद्ध कर के मेघनाद ने उन्हें बंदी बना लिया और अपने रथ के पीछे बांध दिया तब स्वयं ब्र्ह्मा जी को इंद्र की रक्षा के लिए प्रकट होना पड़ा और उनकी आज्ञा सुनकर इंद्र को बंधन से मुक्ति मिली थी, इसलिए उसको इंद्रजीत के नाम से भी जाना जाता है ।
- मेघनाद ने भगवन ब्रह्मा से अमरता का वर मांगा जिस को देने के लिए ब्रह्माजी असमर्थ थे लेकिन उन्हों ने मेघनाद को उसके समान ही वर जरूर दिया। उसे वरदान मिला था की कुल देवी प्रत्यांगीरा के यज्ञ के दौरान मेघनाद को स्वयं त्रिदेव नहीं मार सकते थे और नहीं हरा सकते थे। भगवन ने उसे ये भी वरदान दिया था की उसकी मृत्यु ऐसे इंसान के हाथों होगी जो चौदह वर्षों तक न सोया हो, जिसने चौदह साल तक किसी स्त्री का मुख न देखा हो और चौदह साल तक भोजन न किया हो। रामायण में युद्ध में लक्षमण ही ऐसे थे जिसमे ऐसे सभी लाक्षणिकताए थी। इंद्रजीत का विवाह नागकणः से हुआ था जो पाताल के राजा शेषनाग की पुत्री थी उस वजह से इंद्रजीत को नागपश नामक घातक शस्त्र मिला था।
मेघनाद का वध किसने किया था
- कुंभकर्ण की मृत्यु के बाद मेघनाद युद्ध में उतरा था।मेघनाद की मृत्यु के बाद राम ने बाण के द्वारा मेघनाद की एक भुजा को उसकी पत्नी सुलोचना के पास पहुचाई लेकिन उसे विश्वास नहीं हुआ कि उसके पति की मृत्यु हो चुकी है इस लिए उसने भुजा से कहा अगर तुम वास्तव में मेघनाद की भुजा हो तो मेरी दुविधा को लिखकर दूर करो तब उस कटे हुए हाथ ने आंगन में लक्ष्मण जी के प्रशंसा के शब्द लिखे थे।

